रमलू मिस्त्री कौन?
एक गांव में किसी बेरोजगार रमलू नामक मिस्त्री ने सोचा कि मैं क्या काम कर सकता हूं।
बहुत सोचने के बाद उसके दिमाग आया कि क्यों न मैं गांवों में आटा पीसने की चक्की को मरम्मत करने का काम क्यों न करना प्रारम्भ कर लूं।
उसने गांवों में चक्की मरम्मत करने हेतु प्रशिक्षण न प्राप्त कर ऐसे ही कुछ औजार लेकर एक बुढिया के घर गया।उसने काम शुरू किया तो वृद्धा ने कहा कि "आप काम करो मैं कुएं पर से पानी लेकर आती हूं।"
पहले गांवों में घी को बिल्ली , कुत्तों से बचाने हेतु ऊपर छत से रस्सी से किसी पात्र में टांग दिया करते थे।
वृद्धा ने भी ऐसे ही घी को टांग रखा था।
चक्की की मरम्मत करते हुए रमलू मिस्त्री से चक्की का पाट टूट गया।
उसने भागने की सोची,खड़ा हुआ तो ऊपर टंगे हुए घी का मटके से सिर टकरा गया,सिर टकराते ही घी भरा हुआ मटका फुट कर घी सारा फर्श pr बिखर गया।
दरवाजे से हड़बड़ाते हुए बाहर निकलते समय सामने से आ रही वृद्धा से और टकरा गया।
वृद्धा ने कहा कि "रमलू तेरे को कहा कहा रोऊ।"
भागते हुए रमलू ने कहा कि "माई आगे देखती जाना और रोते जाना"
कहने का भावार्थ है कि इस प्रकार वृद्धा का बहुत नुकसार कर वह अधूरा मिस्त्री चला गया।
18 वी सदी के महर्षि दयानंद ने भी ऐसे ही समाज को गलत ज्ञान देकर अपनी प्रशंसा लूटी जब भारत में अशिक्षा का वातावरण था।
महर्षि दयानंद ने समाज को कैसे गलत ज्ञान दिया ।
जानने के लिए देखे
निम्नलिखित वीडियो
माता पिता विरोधी दयानंद
https://youtu.be/g3EsU5EpHfg
दयानंद दुर्गति
https://youtu.be/4QIVLBtp9_c
बुराई ग्रस्त दयानंद की आदतें
https://youtu.be/AKCdrjLKgX4
परमात्मा साकार अथवा निराकार?
https://youtu.be/HSzv6OQXjiA
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