श्रीराम और लोमष ऋषि की वार्ता सुनकर हैरान रह जाओगे आप 🤭

एक समय की बात है।

जब सीता जी को श्रीराम ने  वाल्मी्कि्
ऋषि के आश्रम में भेज दी तब अयोध्या का किल बनाने  
हेतु जमीन की खुदाई की गई।
जब 25,30 फीट खुदाई हो गई तब
उसमे से एक बड़ा गोल गोल पत्थर
निकला उसको जब फोडा गया तो उसमे से लोमस ऋषि निकले।
उसकी आंखे बंद थी।

इसकी सूचना श्रीराम को दी गई।
श्रीराम ने आकर कहा "नमो नारायण,नमो नारायण।
जैसा भी वो कहते थे।
लोमश जी बोले 
कौन?
श्रीराम जी बोले 
मैं दशरथ पुत्र राम
लोमश जी बोले
वनवास से आ गए?
जी हां
सीता को जंगल में भेज दिया?
हा भेज  दिया 
तब लोमश जी कहा 
"मेरे ऊपर वापिस मिट्टी डाल दो
मैं बाहर नहीं आऊंगा"
क्यों?
लोमश जी बोले कि मैं ऐसे गंदे लोक में नहीं आऊंगा
अब कलियुग आने वाला है ।
तब श्रीराम जी बोले "मैं आपको एक अंगूठी देना चाहता हूं।

लोमश जी बोले
"करमंडल में डाल दो"
श्रीराम जी ने जैसे ही उस करमंडल में अंगूठी डालनी चाही तो उसमे पहले से 83 अंगूठियां और पड़ी हुई मिली।
श्रीराम जी बोले "इसमें तो 83अंगूठियां और पड़ी हुई है।
लोमश जी बोले
"आपके जैसे 83 श्रीराम यहां अयोध्या में राज करके चले गए,आप 84 वे श्रीराम हो।"
कबीर साहेब कहते हैं कि
"तीस करोड़ रामा अवतारी
सीता संग रहती नारी"

इससे सिद्ध ही कि तीस करोड़ श्रीराम होकर इस धरती से चले गए जिनके ऊपर कर्म का दंड लागू था 

ऐसी कहानी सतगुरु रामपाल जी महाराज ने हमे बताई।


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