राजा बलि का अश्वमेध यज्ञ
भक्त प्रह्लाद का पुत्र बैलोचन हुआ। बैलोचन का पुत्र राजा बलि हुआ।राजा बलि ने भी अश्वमेध यज्ञ लिया था। एक अश्वमेध यज्ञ में 100 मन देशी घी प्रयुक्त होता हैं।ऐसी ऐसी 100 अश्वमेध यज्ञ पूरेेेेे होंने पर द्र्् देवराज इंद्र की गद्दी प्राप्त होती हैं। पृथ्वी पर कोई ऐसी सौ यज्ञ कर ले तो उसको देवराज इंद्र की गद्दी प्राप्त होती है।देवराज इंद्र भी इस ताक में रहता हैं कि कैसे ऐसी यज्ञ को खंड किया जाये ताकि मेरा राज्य सुरक्षित रहे। जब राजा बलि की 100वी यज्ञ भी निर्बाध हो रही थीं तो इंद्र बहुत चिंता में पड़ गया। इन्द्र इस समस्या के समाधान हेतु भगवान विष्णु के पास गया तथा उनसे प्रार्थना कर कहा कि "भगवान मेरे राज्य की रक्षा कीजिये। भगवान विष्णु ने कहा कि "मैं कोई उपाय खोजता हूँ।" विष्णु जी ने हा तो भर ली पर कोई समाधान नही निकल रहा था। भगवान विष्णु पूर्ण परमात्मा सेे अर्ज करते है तब पूर्ण परमात्मा एक बामन का रूप धारण कर यज्ञ स्थल पर पहुंचे। उनको देखकर राजा बलि ने उनका सत्कार कर उचित आसान दिया तथा भोजन कराकर दक्...