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Essence of all religions holy books

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(1)कुल एक मालिक एक हैं।वह मानव सदृश है।उस प्रभु का नाम कबीर (कविरदेव)साहेब है।सत्पुरुष, अकाल मूर्ति,परम अक्षर ब्रह्म, वासुदेव (सर्व गतम ब्रह्म)पूर्ण ब्रह्म,अल्लाहु अकबर, सत्य कबीर, हक्का कबीर आदि उस  पूर्ण  परमात्मा कबीर नाााााााााा नाम है। उस पूर्ण परमात्मा का वास्तविक नाम कबीर साहेब(कविर्देव) है ! (२) यही वह परमेश्वर है जिसने एक 6 दिन में सृष्टि रच कर सातवें दिन तख्त पर जा विराजा।( पवित्र  बाइबिल  त्त उत्पति ग्रंथ) (३) कुरान शरीफ  सूरत  फूरकानी नंबर 25, आयत नंबर ,,52 से 59 , फजाइले आमाल के अन्दर , फजाइले  जिक्र , फजाइले दरूद शरीफ आदि में स्पष्ट है। (४)चारो  वेदों   में  भी कविर्देव (कबीर साहेब) नाम से पूर्ण परमात्मा की  महिमा   बताई है। (५)  यजुर्वेद   अध्याय   नंबर 1 के नंबर 15, अ. नंबर  5 के श्लो श्लोक   नम्बर १ तथा 32, अ. न.29के श्लोक न.25 तथा अ. न.40 के श्लोक नम्बर  8 में  प्रमाण   कि परमात्मा सशरीर है तथा आकार में है।वह कबीर साहेब(कविर्देव) है,जो...

श्रीराम और लोमष ऋषि की वार्ता सुनकर हैरान रह जाओगे आप 🤭

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एक  समय  की बात है। जब सीता जी को  श्रीराम ने  वाल्मी्कि् ऋषि के  आश्रम में भेज दी तब  अयोध्या  का किल बनाने   हेतु जमीन की खुदाई की गई। जब 25,30 फीट खुदाई हो गई तब उसमे से एक बड़ा गोल गोल  पत्थर निकला उसको जब फोडा गया तो उसमे से लोमस ऋषि निकले। उसकी आंखे बंद थी। इसकी  सूचना  श्रीराम को दी गई। श्रीराम ने आकर कहा "नमो नारायण,नमो नारायण। जैसा भी वो कहते थे। लोमश जी बोले  कौन? श्रीराम जी बोले  मैं दशरथ पुत्र राम लोमश जी बोले वनवास से आ गए? जी हां सीता को जंगल में भेज दिया? हा भेज  दिया  तब लोमश जी कहा  "मेरे ऊपर वापिस मिट्टी डाल दो मैं बाहर नहीं आऊंगा" क्यों? लोमश जी बोले कि मैं ऐसे गंदे लोक में नहीं आऊंगा अब  कलियुग आने वाला है । तब श्रीराम जी बोले "मैं आपको एक अंगूठी देना चाहता हूं। लोमश जी बोले "करमंडल में डाल दो" श्रीराम जी ने जैसे ही उस करमंडल में अंगूठी डालनी चाही तो उसमे पहले से 83 अंगूठियां और पड़ी हुई मिली। श्रीराम जी बोले "इसमें तो 83अंगूठियां और पड़ी हुई है। लोमश जी बोले "आपक...

राजा बलि का अश्वमेध यज्ञ

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भक्त प्रह्लाद का पुत्र बैलोचन हुआ। बैलोचन का पुत्र राजा बलि हुआ।राजा बलि ने भी अश्वमेध यज्ञ लिया था। एक अश्वमेध यज्ञ में 100 मन देशी घी प्रयुक्त होता हैं।ऐसी ऐसी 100  अश्वमेध यज्ञ  पूरेेेेे होंने पर द्र्् देवराज इंद्र की गद्दी प्राप्त होती हैं। पृथ्वी   पर कोई ऐसी सौ यज्ञ कर ले तो उसको देवराज इंद्र की गद्दी  प्राप्त होती है।देवराज इंद्र भी इस ताक में रहता हैं कि कैसे ऐसी यज्ञ को खंड किया जाये ताकि मेरा  राज्य  सुरक्षित रहे। जब राजा बलि की 100वी यज्ञ भी निर्बाध हो रही थीं तो इंद्र बहुत चिंता में पड़ गया। इन्द्र इस  समस्या  के  समाधान हेतु  भगवान विष्णु  के पास गया तथा उनसे प्रार्थना कर कहा कि "भगवान मेरे राज्य की  रक्षा कीजिये। भगवान विष्णु ने कहा कि "मैं कोई उपाय खोजता हूँ।" विष्णु जी ने हा तो भर ली पर कोई समाधान नही निकल रहा था। भगवान विष्णु  पूर्ण परमात्मा  सेे अर्ज करते है तब पूर्ण परमात्मा एक बामन का रूप धारण कर यज्ञ स्थल पर पहुंचे। उनको देखकर राजा बलि ने उनका सत्कार कर उचित आसान दिया तथा भोजन कराकर दक्...

रमलू मिस्त्री कौन?

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एक गांव में किसी बेरोजगार रमलू नामक मिस्त्री ने सोचा कि मैं क्या काम कर सकता हूं। बहुत सोचने के बाद उसके दिमाग आया कि क्यों न मैं गांवों में आटा पीसने की चक्की को मरम्मत करने का काम क्यों न करना प्रारम्भ कर लूं। उसने गांवों में चक्की मरम्मत करने हेतु प्रशिक्षण न प्राप्त कर ऐसे ही कुछ औजार लेकर एक बुढिया के घर गया।उसने काम शुरू किया तो वृद्धा ने कहा कि "आप काम करो मैं कुएं पर से पानी लेकर आती हूं।" पहले गांवों में घी को  बिल्ली , कुत्तों से बचाने हेतु ऊपर छत से रस्सी से किसी पात्र  में टांग दिया करते थे। वृद्धा ने भी ऐसे ही घी को टांग रखा था। चक्की की मरम्मत करते हुए रमलू मिस्त्री से चक्की का पाट टूट गया। उसने भागने की सोची,खड़ा हुआ तो ऊपर टंगे हुए घी का मटके से सिर टकरा गया,सिर टकराते ही घी भरा हुआ मटका फुट कर घी सारा फर्श pr बिखर गया। दरवाजे से हड़बड़ाते हुए बाहर निकलते समय सामने से आ रही वृद्धा से और टकरा गया। वृद्धा ने कहा कि "रमलू तेरे को  कहा  कहा रोऊ।" भागते हुए रमलू ने कहा कि "माई आगे देखती जाना और रोते जाना" कहने का भावार्थ है कि इस प्रकार वृद्धा क...

क्या महर्षि वाल्मीकि द्वारा जपा हुए मंत्र सही है?

  महर्षि वाल्मीकि के बारे में संत रामपाल जी महाराज के विचार🤭 प्रश्न:- महर्षि बाल्मिकी जी तो सत्ययुग में हुए थे, वे भी राम-राम जपते थे। क्या यह मन्त्रा भी शास्त्रा प्रमाणित नहीं हैं? उत्तर:- पूर्व में बताया है कि गीता अध्याय  4  श्लोक  1.2  में गीता ज्ञान दाता ने बताया है कि यह ज्ञान मैंने सूर्य को सुनाया था। उसने अपने पुत्रा मनु जी को सुनाया। फिर कुछेक राजऋषियों को प्राप्त हुआ। सत्ययुग के प्रारम्भ में ही ये सब सूर्य, मनु व राजर्षि हुए हैं। उनके बाद यह ज्ञान नष्ट हो गया था। महर्षि बाल्मिकी जी को सप्त ऋषि मिले थे। उन्होंने तपस्या करके सिद्धियाँ प्राप्त की थी। वही हठयोग करके तप विधि महर्षि बाल्मिकी जी को उन्होंने बता दी। जिस हठ योग तप को महर्षि बाल्मिकी जी ने तन-मन से श्रद्धा से किया। कुछ समय उपरान्त शरीर के ऊपर के भाग (सिर) में से आवाज सुनाई दी थी। वह थी “राम-राम”। उसी शब्द का उच्चारण महर्षि बाल्मिकी जी तपस्या के दौरान करने लगे। सुनने वाले को ऐसा लगता है जैसे ये मरा, मरा बोल रहे हैं, वास्तव में राम-राम का ही उच्चारण करते थे। उनको तपस्या का परिणाम मिला, उनमें सिद्...

मंदिरों का रहस्य

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एक धनी व्यक्ति ने अपने धन को अपने घर में गढ्ढ़ा खोदकर दबा दिया। उस स्थान का केवल धनी व्यक्ति को ही पता था। उस धनी व्यक्ति ने एक बही (पैड) में सांकेतिक स्थान लिख दिया। धनी व्यक्ति की मृत्यु अचानक हो गई। पिता का संस्कार करके पुत्रों ने वह पैड उठाई जिसमें पिता जी कहता था कि इस बही में धन कहाँ है, यह लिखा है। जिसे पिता जी किसी को नहीं दिखाते थे। धनी व्यक्ति के मकान के आगे आँगन था, उस आंगन के एक कोने में मन्दिर बना था। बही (पैड) में लिखा था कि चाँदनी चैदस रात्रि  2  बजे सारा धन मन्दिर के गुम्बज में दबा रखा है। लड़कों ने मन्दिर का गुम्बज रात्रि के  2  बजे फोड़कर धन खोजा, कुछ नहीं मिला। बच्चों को बड़ा दुःख हुआ। एक दिन उनके पिता का मित्रा दूसरे गाँव से शोक व्यक्त करने आया। बच्चों ने यथास्थान पर धन न मिलने की चिंता जताई। उस धनी के मित्रा ने वह बही मँगाई और व्याख्या पढ़ी तो कहा कि मन्दिर के गुम्बज का पुनः निर्माण कराओ। वैसा ही कराना। मैं फिर किसी दिन आऊँगा, तब धन वाला स्थान बताऊँगा। वह व्यक्ति चांदनी चैदस को आया। रात्रि के दो बजे जिस स्थान पर मन्दिर के गुम्बज की चाँद की रोशनी से छा...

Power of the god

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पूर्ण गुरु की शक्ति Vito power of sant rampal ji ’’पूर्ण गुरू के वचन की शक्ति से भक्ति होती है‘‘ उदाहरण:- गुरू जी से दीक्षा लेकर भक्ति करना लाभदायक है। बिना गुरू के भक्ति करने से कोई लाभ नहीं होता। #उदाहरण:-   एक राजा की रानी बहुत धार्मिक थी। उसने परमेश्वर कबीर जी से गुरू दीक्षा ले रखी थी। वह प्रतिदिन गुरू दर्शन के लिए जाया करती थी। राजा को यह अच्छा नहीं लगता था, परंतु वह अपनी पत्नी को वहाँ जाने से रोक नहीं पा रहा था। कारण, एक तो वह उस बड़े शक्तिशाली राजा की लड़की थी, दूसरे वह अपनी पत्नी को प्रसन्न देखना चाहता था। एक दिन राजा ने अपनी पत्नी से कहा कि आप नाराज न हो तो बात कहूँ? रानी ने कहा कहो। राजा ने कहा कि आप अपने गुरू के पास जाती हंै, भक्ति तो गुरू के बिना भी हो सकती है। रानी ने कहा कि गुरू जी ने बताया है कि गुरू के बिना भक्ति करना व्यर्थ है। राजा ने कहा कि मैं तेरे साथ कल तेरे गुरू जी से मिलूँगा, उनसे यह बात स्पष्ट करूँगा। राजा ने सन्त जी से प्रश्न किया कि आप जनता को मूर्ख बना रहे हो कि गुरू बिन भक्ति नहीं होती, क्यों भक्ति सफल नही होती? नाम मन्त्रा जाप करने होते हैं। एक-दूसरे स...