धर्म यज्ञ का महत्व

धर्म यज्ञ का महत्व बताते हुए सतगुरु रामपाल जी महाराज ने उदाहरण देकर बताया कि धर्म यज्ञ कैसे हमें इतनी फलदायक होती है उन्होंने उदाहरण दिया है एक कहानी के माध्यम से।

समझाया है की एक शहरी बाबू की ड्यूटी ग्रामीण रूरल क्षेत्र में लग गई,वह ग्रामीण क्षेत्र में आ गया तो उसने देखा कि खेत में किसान गेहूं डाल रहा है उस बाबू ने देखा कि किसान तो गेहूं खेत में बिखेर रहा है यह कैसा मूर्ख व्यक्ति है?
गेहूं तो चक्की में पीसकर आटा रोटी बनाकर खाने की चीज है और यह मूर्ख खेत में ऐसे ही बिखेर रहा है।
 उसने उस किसान को बतलाया और उससे कहा कि भाई यह तो खाने की चीज है तो तुम क्यों बेकार में बिखेर रहे हो?
अब उस किसान ने सोचा कि यह कोई बोलिबुच शहरी बाबू है।
किसान ने उस बाबू को समझाया कि देखो आज मैं जो गेहूं बो रहा हूं आप 3 महीने बाद वापस आना आप इसका रिजल्ट देखना ।
ऐसा ही किया गया उस शहरी व्यक्ति ने 3 महीने बाद आया 3 महीने बाद मार्च महीने में फसल पकने को हो गई एक गेहूं बोया उसकी जगह गेहूं बड़ा होकर बाली में 5,5 फलिया लग रहे थे एक में 30 30 गेहूं के दाने दाने लग गए किसान ने उस बाली को खोल कर उस शहरी व्यक्ति को बताया कि जो मैंने गेहूं बोया था अब मुझे इतने गेहूं प्राप्त होंगे ठीक उसी प्रकार आज हम धर्म यज्ञ में जो पैसा लगाते हैं वह हमें कितना गुना अधिक होकर मिलेगा यह संत रामपाल जी महाराज ने सत्संग में बताया परमात्मा कहते हैं धर्म तो धसके  नहीं ,धसके तीनो  लोक खेरायत में खेर है किजै आत्मबोध।
प्रतिदिन अवश्य सुनिए सत्संग सतगुरु रामपाल जी महाराज साधना टीवी 7:30 से 8:30 तक और अधिक 
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