परमात्मा मिलन
वाजिद राजा की पूरी कहानी।
#MessageOfAllahOnEid
Allah Kabir
राजस्थान के रेगिस्तान में एक समय एक वाजिद नाम के राजा हुए थे यह कुछ एक आत्माएं होती है जो स्वर्ग से आती है यह लोग स्वर्ग से आते है किसी समय भक्ति करते हैं इनमें वैराग्य जो का जो रहता है। जब कभी राजा को कभी किसी दूसरे शहर में जाना होता था तो राजा अपने पूरे काफिले के साथ सभी अनाज घोड़ों पर भरकर एक शहर से दूसरे शहर में जाते समय बड़ा काफिला लेकर जाते थे एक समय बाजी जी अपने पूरे काफिले के साथ रेगिस्तान से गुजर रहे थे पहाड़ों की तंग गली से काफी ला गु जर रहा था।एक समय राजेश जी अपने काफिले के साथ कहीं जा रहे थे काफिला बीच रास्तों से पहाड़ों के बीच से गुजर रहा था जो एक सिंगल टू सिंगल लाइन में एक एक ऊंट जाता था उनको को एक रस्सी से दूसरे ऊंट को बांध दिया जाता था इस प्रकार से काफिला गुजर रहा था कि आगे बीच पहाड़ों के बीच गली में जाकर एक ऊंट मर गया अचानक।
उनके मरने से पूरा काफिला रुक गया ट्राफिक लग गया वाजी द जी ने पूछा यह मेरी आज्ञा के बिना यह सारा काफिला कैसे रुक गया ?
तो कुछ देर में पता करने पर मालूम हुआ कि आगे ऊंट मर गया है वाजिद जी ने वहां जाकर देखा कि एक ऊंट मरा हुआ है उसकी आंखें भी बिल्कुल स्वस्थ है नाक कान पूरा शरीर एकदम बिल्कुल स्वस्थ है और उठ मर गया है राजा बाजी द जी ने अपने साथियों से कहा यह मेरी आज्ञा के बिना कैसे मर गया?अब राजा के साथ विद्वान लोग भी होते थे उन विद्वान लोगों ने बताया कि राजन आप के दादा परदादा माता-पिता सब चले गए इस शरीर में जो जीव संस्कार बस रह रहा है उसका संस्कार पूरे होने पर वह शरीर को त्याग कर चला जाता है अतः ऊंट वाले शरीर में जो जीव था वह उसका संस्कार पूरा होने पर चला गया अतः मर चुका है यहां सभी को मरना है आप भी मरोगे हम भी मरेंगे एक दिन सबको मरना है यह सुनकर बाजी जीने कहा वापस चलो पूरा काफिला वापस मोड़ दिया गया घर आकर वाजिद जी ने अपने अपने शरीर सारे शरीर के वस्त्र त्याग कर एक सिर्फ एक कंबल लेकर निकल गए जंगल में जाकर तपस्या करने लगे कभी शहर में जाते हैं कभी वापस आते इस प्रकार भीख मांग कर खाते थे एक समय वाजिद जी एक शहर में खाना मांगने हेतु गए दो-तीन दिन से उस शहर में खाना मिला ही नहीं वापस आते समय एक कुत्तिया देखी एक कुत्तिया उनके आस पास रहती थी उस कुत्तिया को खाना नहीं मिला अपने बच्चों को क्या खिलाएं कूतिया के बच्चे भी भूखे थे तभी वहां से एक बुढ़िया मिलती है बुढ़िया के पास चार रोटी थी वाजिद ने बुढ़िया को देखकर कहा बुढ़िया इस कुत्तिया को रोटी दे दे या बुढ़िया मेरे को चाहे कुछ भी इसके लिए देना पड़े आप इस कुत्तिया को एक रोटी दे दो बुढ़िया चतुर थी उसने कहा आप अपनी कमाई का आधा हिस्सा मुझे दे दो तब मैं आपको रोटी दूंगी वाजिद ने अपनी कमाई का एक १/४ हिस्सा आपको अर्पण करता हूं संकल्प कर लिया तब बुढ़िया ने एक रोटी कुत्तिया को से दी उसके बाद कुत्तिया वापिस मुंह देख रही है वाजिद जी ने कहा बुढ़िया एक रोटी उस कुत्तिया को और दे दो बुढ़िया ने कहा बुढ़िया ने कहा मुझे आपकी कमाई का एक छोटा हिस्सा मुझे देना पड़ेगा बुढ़िया ने रोटी कुत्तिया को दे दी कुत्तिया ने खा ली इस प्रकार वाजिद जी की सारी कमाई चली गई
वाजिद जी उस शहर में खाने-पीने कायथा पूरा प्रबंध नहीं होने से उस शहर को छोड़कर किसी दूसरे जगह जाकर रहने लगे लेकिन बाजी सप्ताह से भूखे थे वह ना तो कोई झोपड़ी नहीं डाल पा रहे थे भूख से उनकी तबीयत भी बिगड़ रही थी
तभी परमात्मा कबीर जी व हा आते हैं और वाजिद जी से बात करते हैं वाजिद जी ने कहा कि मैं छह-सात दिन से भूखा हूं मुझे कई दिनों से रोटी नहीं मिल रहा तब परमात्मा कबीर जी ने उन को भोजन कराया और जंगल में जाकर लकड़ियां काट कर लाए हैं उनके एक झोपड़ी डाल दी फिर उनसे ज्ञान चर्चा की बाजी द जी ने कहा कि आप बाजी जी ने पूरी कहानी परमात्मा को बताई मैंने परमात्मा के लिए राजपाट त्याग कर आया हूं अब मुझे कहीं भी भगवान के दर्शन भी नहीं हुए और ना रोटी मिल पा रही है तो परमात्मा ने कहा कि आप परमात्मा के दर्शन भी करना चाहते हो और उनको निराकार भी मां नते हो यह दोनों कैसे होगा परमात्मा ने काम मैं खुद परमात्मा हूं इस बात पर वाजिद जी को यकीन नहीं हुआ था आप खुद परमात्मा कैसे हो?
मैं तो परमात्मा को निराकार मानता हूं परमात्मा जी ने कहा कि मैं परमात्मा हूं आप अपनी कुरान शरीफ खोल कर देखो उसमें लिखा है कि कुरान शरीफ का ज्ञान दाता खुद कह रहा है कि वह परमात्मा कबीर है जिसने ६ दिन में सृष्टि की रचना की और सातवें दिन तख्त पर बिराजा और परमात्मा साकार है वह परमात्मा में ही हूं तब परमात्मा कबीर जी ने बाजी जी को यथार्थ उपदेश कर उनको दीक्षा देख कर अपना विशाल स्वरूप दिखाया और उनको पार किया
संत गरीबदास जी महाराज की वाणी में भी आता है की गरीब बुढ़िया और वाजिद सुन्ही के आनंद
रोटी चारों धाम है कांटे गल के फंड।
गरीब दीदार हुए तब वाजिद यकीन कर लिनहा
संत रामपाल जी महाराज के सत्संग प्रवचन से
पूरी स्टोरी देखने के लिए सोने अवश्य सत्संग संत रामपाल जी महाराज के
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